मत्स्य विभाग में 2.16 करोड़ की गड़बड़ी, एफआइआर के बाद जांच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में?
राजनांदगांव। जिले के मत्स्य विभाग में 2 करोड़ 16 लाख रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस ने आनन-फानन में सिर्फ दो घंटे के भीतर एफआइआर दर्ज कर दी, लेकिन अब जांच का हवाला देकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, मत्स्य विभाग में हुई वित्तीय अनियमितता को लेकर एक प्रतिवेदन पुलिस को सौंपा गया। इसके बाद जिला कार्यालय से निकलते ही एफआइआर दर्ज करने का दबाव बनाया गया और महज दो घंटे के अंदर मामला दर्ज कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि बगैर विस्तृत जांच और गवाहों के बयान दर्ज किए ही पुलिस ने तुरंत एफआइआर दर्ज कर दी।
मामले को लेकर पुलिस विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मत्स्य विभाग में हुई इस गड़बड़ी में पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी का नाम सामने आ रहा है। यही कारण है कि एफआइआर दर्ज होने के बावजूद अब जांच का हवाला देकर कार्रवाई को धीमा कर दिया गया है।
अब इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत के आरोप भी लग रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि जब गड़बड़ी के प्रमाण मौजूद थे, तो बिना जांच के एफआइआर क्यों दर्ज की गई? और अब जब जांच जरूरी है, तो कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है?
मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। वहीं, पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर जनता में आक्रोश बढ़ रहा है।
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